Noida News: नोएडा उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध शहर है। हर कोई नोएडा के विषय में जानना चाहता है। यहां नोएडा के प्रतिदिन के सभी समाचार अखबारों के हवाले से हम समाचार प्रकाशित करते हैं। नोएडा शहर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों में 14 जुलाई को क्या खास समाचार प्रकाशित हुए हैं यहां एक साथ पढऩे को मिलेंगे।
Noida News: समाचार अमर उजाला से
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “नो एंट्री के समय डंपर की टक्कर से महिला की मौत, लोगों का प्रदर्शन” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि बेटे के जन्मदिन पर रविवार को फूल लेने के लिए स्कूटी पर जा रहे पति-पत्नी महागुन मार्ट के पास एक कार को ओवरटेक करते समय डंपर के नीचे आ गए। नियम तोड़कर चालक डंपर को नो एंट्री के समय दौड़ा रहा था। डंपर का पिछला पहिया चढ़ने के कारण महिला की मौत हो गई जबकि घायल पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बिसरख कोतवाली पुलिस शव का पोस्टमॉर्टम करा उपर चालक की तलाश कर रही है। इधर, हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। इससे करीब ढाई घंटे तक जाम लगा रहा। पुलिस की ओर से कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही लोग घर लौटे। एसीपी सेंट्रल नोएडा दीक्षा सिंह के अनुसार, तेजस चौधरी (32) परिवार के साथ रक्षा आहेल्ला मोसाइटी के एच-604 में फ्लैट में तीन साल से रह रहे हैं। वह गौड़ सिटी में एक रेस्तरां का संचालन कर परिवार का खर्च चलाते हैं। रविवार को तेजस के जन्मदिन पर पिता राज नारायण (57) व मां सविता चौधरी (55) सुबह 10 बजे सोसाइटी से स्कूटी पर गौड़ सिटी-2 के पास फूल लेने के लिए निकले थे। सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला है कि स्कूटी सवार दंपती जिस जगह से गुजर रहे थे वहां सड़क किनारे एक कार खड़ी थी। दंपती की स्कूटी के बगल में ट्रैक्टर ट्रॉली चल रही थी। इस कारण दंपती ने बांयी तरफ से कार को ओवरटेक किया। इस दौरान वह पीछे से आ रहे ईंट के रेत से लदे डंपर की चपेट में आ गए।
Noida News:
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “29 बिल्डरों व आवंटियों पर 15 हजार करोड़ का बकाया” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि नोएडा प्राधिकरण के 100 करोड़ से अधिक के 29 बिल्डरों व अलग-अलग विभागों के आवंटियों पर 15 हजार करोड़ से अधिक का बकाया है। ऐसे बकायेदारों के मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कुछ मामले शासन में भी लंबित हैं। प्राधिकरण की ओर से बकाये की रकम वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। अगर यह पैसे वापस मिलते हैं तो इससे शहर के विकास कार्य में तेजी आ सकती है। बीते दिनों औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी के साथ समीक्षा बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। दरअसल, नोएडा प्राधिकरण के वाणिज्यिक बिल्डर प्लॉट के 10, संस्थागत विभाग के तीन और ग्रुप हाउसिंग विभाग के 16 बिल्डर और आवंटी शामिल हैं। इनके मामलों में प्राधिकरण ने कई बार नोटिस भेजकर बकाया रकम के भुगतान के निर्देश दिए। लेकिन दूसरी पार्टी या तो कोर्ट चली गई या फिर शासन में धारा 41(3) के तहत अपील की गई। कुछ मामलों में शासन ने आदेश जारी किए तो कई मामले अभी लंबित हैं। कुछ मामलों में उक्त बिल्डरों और आवंटियों का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चल रहा है। इस वजह से प्राधिकरण की बकाये की रकम पूरी तरह से फंस गई अब प्राधिकरण का विधिक विभाग इस पन कवायद कर रहा है।
Hindi News:
अमर उजाला ने 14 जुलाई 2025 के अंक में प्रमुख समाचार “बंदियों के अंधेरे जीवन में शिक्षा बनी उम्मीद की नई किरण” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि नोएडा प्राधिकरण के 100 करोड़ से अधिक के 29 बिल्डरों व अलग-अलग विभागों के आवंटियों पर 15 हजार करोड़ से अधिक का बकाया है। ऐसे बकायेदारों के मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कुछ मामले शासन में भी लंबित हैं। प्राधिकरण की ओर से बकाये की रकम वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। अगर यह पैसे वापस मिलते हैं तो इससे शहर के विकास कार्य में तेजी आ सकती है। बीते दिनों औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी के साथ समीक्षा बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। दरअसल, नोएडा प्राधिकरण के वाणिज्यिक बिल्डर प्लॉट के 10, संस्थागत विभाग के तीन और ग्रुप हाउसिंग विभाग के 16 बिल्डर और आवंटी शामिल हैं। इनके मामलों में प्राधिकरण ने कई बार नोटिस भेजकर बकाया रकम के भुगतान के निर्देश दिए। लेकिन दूसरी पार्टी या तो कोर्ट चली गई या फिर शासन में धारा 41(3) के तहत अपील की गई। कुछ मामलों में शासन ने आदेश जारी किए तो कई मामले अभी लंबित हैं। कुछ मामलों में उक्त बिल्डरों और आवंटियों का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चल रहा है। इस वजह से प्राधिकरण की बकाये की रकम पूरी तरह से फंस गई अब प्राधिकरण का विधिक विभाग इस पन कवायद कर रहा है।
Noida News: समाचार दैनिक जागरण से
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में 14 जुलाई 2025 का प्रमुख समाचार “बंदियों के अंधेरे जीवन में शिक्षा बनी उम्मीद की नई किरण” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि निरुद्ध बंदियों के जीवन में शिक्षा नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। सत्र वर्ष 2025-26 के दौरान कई बंदियों ने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक और विभिन्न प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर अपने जीवन को संवारने की कोशिश की है।
हालांकि सबसे ज्यादा रुचि रोजगार परक कार्यक्रमों के प्रति दिख रही है। इन प्रमाणपत्र आधारित पाठ्यक्रमों में 14 सजायाफ्ता कैदियों ने दाखिले के लिए आवेदन किया है। जबकि, हाईस्कूल-इंटरमीडिएट और उच्च शिक्षा के लिए कुल छह बंदियों ने आवेदन भरे हैं। जेल प्रशासन की पहल और बंदियों की लगन से शिक्षा का यह सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है। हाईस्कूल में एक तो इंटर में दो ने भरे आवेदन : हाईस्कूल की पढ़ाई में प्रवीन कुमार ने नामांकन कराया है, जो 23 अगस्त 2024 से जेल में निरुद्ध हैं। वहीं हेमंत कुमार चौहान और प्रमोद कुमार इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे हैं। हेमंत 22 दिसंबर 2019 से और प्रमोद चार फरवरी 2025 से जेल में निरुद्ध है।
14 ने किया रोजगार परक कार्यक्रमों के लिए आवेदन: जेल में बंद चार बंदियों ने सत्र जनवरी-2025 में भोजन एवं पोषण प्रमाण पत्र (सीएफएन) के लिए आवेदन किया है। इनमें दो बंदी चोरी के आरोप में 25 नवंबर से 2024 से जेल में बंद है। जबकि एक बंदी 11 जून 2023 से धोखाधड़ी के आरोप में बंद है। वहीं एक बदी 8 सितंबर 2024 से से दहेज हत्या के मामले में में जेल में बंद है। वहीं मानव अधिकार प्रमाण पत्र (सीएचआर) के लिए भी आठ बंदियों ने आवेदन किया है। इनमें पहला बंदी 23 अगस्त 2024 में धोखाधड़ी के आरोप में जेल में बंद है।
दूसरा हत्या के मामले में 22 दिसंबर 2019 से जेल में बंद है। तीसरा चार फरवरी 2025 में दहेज हत्या के मामले में जेल में बंद है। चौथा 10 अगस्त 2023 से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में जेल में बंद है। पांचवां 16 दिसंबर 2023 से गैर इरादतन हत्या के मामले में जेल में बंद है। छठवां 27 अगस्त 2023 से हत्या के मामले में जेल में बंद है। सातवां आठ दिसंबर 2023 से धोखाधड़ी, आठवां 26 सितंबर 2018 से हत्या के मामले में जेल में बंद है। वहीं दो व्यक्तियों ने ग्राम विकास प्रमाण पत्र (सीआरडी) के लिए आवेदन किया है है।
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में प्रमुख समाचार “महाराष्ट्र के बाद जिला अस्पताल में शुरू हुई गर्भवती की थैलेसीमिया स्क्रीनिंग” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि महाराष्ट्र में महिलाओं की थैलेसीमिया जांच अनिवार्य होने के बाद गौतमबुद्ध नगर के जिला अस्पताल में भी गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। दो माह के ट्रायल में चिकित्सकों ने 682 महिलाओं के सैंपल लेकर जांच की, जिसमें आठ गर्भवती के अंदर थैलेसीमिया की पुष्टि हुई है। अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों की काउंसलिंग के लिए सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआइ के हीमोटेलाजी एंड आन्कोलाजी विभाग के साथ एमओयू किया है। महिला मरीजों की पीजीआइ में काउसलिंग होती है। वहीं, गर्भवतियों में एचपीएलसी और एचबीएसी की जांच के लिए मशीन भी इंस्टाल की गई है। खास बात है कि गर्भवती और उनके पति की रिपोर्ट पाजिटिव आने पर गर्भस्थ शिशु की जांच के लिए सैंपल दिल्ली एम्स में भेजा जाएगा।
जिला अस्पताल में थैलेसीमिया की कार्यवाहक सीएमएस डा. अजय राणा ने बताया कि ग्रस्त गर्भवती और अन्य मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया है। इस वार्ड में चाइल्ड पीजीआइ की टीम भी मौजूद रहती है। इन मरीजों के लिए बायो-रेड-डी 10 मशीन लगाई गई है। इसमें एचपीएलसी और एचबीए।सी की जांच होती है, जो वंशानुगत हीमोग्लोबिन विकारों के निदान के लिए सबसे तेज और सटीक तकनीक है। उनका कहना है कि अस्पताल में रोजाना 20 से 25 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है जबकि ओपीडी में 50 से 70 गर्भवतियां विभिन्न तरह की जांच और परामर्श के लिए पहुंचती हैं। इनमें से अभी तक 682 महिलाओं की जांच के लिए सैंपल एकत्रित किया है, लेकिन आठ गर्भवतियों की रिपोर्ट पाजिटिव मिली है। इनकी रिपोर्ट चाइल्ड पीजीआइ के हीमेटोलाजी व आन्कोलाजी विभाग में हेड डा. नीता राधाकृष्णन के पास भेजते हैं। डा. नीता का कहना है कि जिला अस्पताल के सैंपल में फिर यहां एनबीए 2 का पता करते हैं। इसके लिए जेनेटिक विभाग को भी शामिल किया गया है। उनका दावा है कि पीजीआइ में सिर्फ 85 सैंपल की जांच पूरी हुई है। जांच में पति-पत्नी वाहक मिलते हैं तो उनके गर्भस्थ शिशु का सैंपल दिल्ली एम्स भेजते हैं।
डा. नीता के मुताबिक, जिला अस्पताल में गर्भवतियों के आने वाले सैंपल में थैलेसीमिया की जांच के साथ विशेषज्ञों की टीम जल्द ही बीमारी होने का कारण भी पता करेगी। जेनेटिक विभाग में जर्मनी तकनीक की मशीन इंस्टाल हो चुकी है। अगले महीने तक कारण जानने के लिए जांच की अनुमति मिलते ही टेस्टिंग शुरू कर दी जाएगी। गर्भवतियों की काउंसलिंग के बाद उनका इलाज जिला अस्पताल के साथ उनकी निगरानी में होता है।
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में 14 जुलाई का प्रमुख समाचार “अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत, स्वजन का हंगामा” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि बिसरख कोतवाली क्षेत्र स्थित क्लाउड नाइन अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत के बाद पीड़ित स्वजन ने हंगामा किया। पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत किया। स्वजन ने अस्पताल प्रबंधन पर नवजात के उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
गौर सिटी सोसायटी के 14 एवेन्यू में तपन अग्रवाल पत्नी रिया के साथ रहते हैं। दोनों साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। रिया वर्क फ्राम होम करती हैं। बृहस्पतिवार की शाम करीब पांच बजे प्रसव पीड़ा होने पर तपन ने उन्हें क्लाउड नाइन अस्पताल भर्ती कराया। रात करीब पौने नौ बजे सिजेरियन डिलीवरी से बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के तुरंत बाद से ही बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हो न रही थी। आरोप है कि उस समय अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टर नहीं था। सिलिंडर के जरिये आक्सीजन देने की कोशिश की गई। रात साढ़े 11 बजे बच्ची की हालत सामान्य बताई गई। पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि बच्ची को सात से आठ दिन आइसीयू में रखना पड़ेगा। इलाज को 50 हजार रुपये का भुगतान करा दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। शुक्रवार को पूरे दिन बच्ची की सेहत सामान्य बताई गई।
रात दो बजे स्वजन को बताया गया कि मां स्तनपान कराने को तैयार नहीं हैं, इसलिए बच्ची को फार्मूला मिल्क दिया जाएगा। तपन ने सहमति जता हस्ताक्षर कर दिए। जब तपन ने बच्ची को आइसीयू में देखा तो वह सामान्य दिख रही थी। शनिवार सुबह साढ़े सात बजे अस्पताल की ओर से फोन आया कि बच्ची की हालत बिगड़ गई है। सुबह नौ बजे सूचना दी गई कि बच्ची की मौत हो गई है। तपन ने मेडिकल हिस्ट्री मांगी तो टालमटोल शुरू कर दी। स्वजन ने अस्पताल में हंगामा किया। स्वजन का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पोस्टमार्टम में भी जानबूझकर देरी करवाई, ताकि लापरवाही के साक्ष्य मिटाए जा सकें। बिसरख कोतवाली प्रभारी मनोज सिंह का कहना है कि शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में किसी भी तरह की चिकित्सीय लापरवाही नहीं हुई है। वरिष्ठ डाक्टरों सहित टीम ने समय पर और उचित देखभाल प्रदान की। पोस्टमार्टम किया गया है और रिपोर्ट का इंतजार है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बिना लापरवाही के आरोप अनुचित हैं। कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करें।
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