DMRC की स्मार्ट पहल, अब चलती मेट्रो में नहीं घिसटेगा कोई सामान या कपड़ा

खुद-ब-खुद लगेगी इमरजेंसी ब्रेक
DMRC ने फिलहाल ट्रायल के तौर पर एक मेट्रो ट्रेन में इस तकनीक को इंस्टॉल किया है जबकि चार और ट्रेनों में इसे लगाया जा रहा है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि अगर दरवाजे बंद होने के दौरान किसी कपड़े या सामान के फंसने की स्थिति बनती है, तो ट्रेन खुद-ब-खुद इमरजेंसी ब्रेक लगा देगी। यानी दरवाजों में फंसी चीजें घिसटने से बच जाएंगी और जान का खतरा टल जाएगा।दबाव का तुरंत चलेगा पता
DMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कुमार ने जानकारी दी कि यह एंटी-ड्रैग फीचर ट्रेनों के दरवाजों के बीच होने वाले दबाव का तुरंत पता लगाता है और इसी के आधार पर ट्रेन की गति रोकी जाती है। पहले दरवाजों में रुकावट पहचानने की क्षमता 15 मिमी थी जिसे अब घटाकर सिर्फ 7 मिमी कर दिया गया है ताकि पतले कपड़े भी पहचान में आ सकें।कहां लगाई जाएगी यह तकनीक?
DMRC अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक फिलहाल पुरानी मेट्रो लाइनों में ही जरूरी है क्योंकि नई लाइनों जैसे पिंक और मैजेंटा में पहले से ही प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD) लगे हैं, जो दरवाजों में किसी के फंसने की संभावना को बहुत हद तक खत्म कर देते हैं। आने वाले फेज 4 के सभी स्टेशनों पर PSD अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। यात्रियों को और अधिक सतर्क करने के लिए DMRC मेट्रो ट्रेनों के अंदर घोषणाओं के जरिए भी जागरूकता फैला रहा है। यात्रियों को साड़ी, दुपट्टा, धोती या बैग के स्ट्रैप आदि का खास ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।यह भी पढ़े: दिल्ली सरकार की नई पहल, भुक्कड़ों के लिए खुलेगी खास मार्केट
यात्रियों की सुविधाओं का रखा जा रहा ख्याल
इस नई पहल से दिल्ली मेट्रो न केवल सफर को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा रही है, बल्कि तकनीक के जरिए यात्रियों की छोटी-छोटी असुविधाओं को भी गंभीरता से ले रही है। Delhi MetroAdvertisement
खुद-ब-खुद लगेगी इमरजेंसी ब्रेक
DMRC ने फिलहाल ट्रायल के तौर पर एक मेट्रो ट्रेन में इस तकनीक को इंस्टॉल किया है जबकि चार और ट्रेनों में इसे लगाया जा रहा है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि अगर दरवाजे बंद होने के दौरान किसी कपड़े या सामान के फंसने की स्थिति बनती है, तो ट्रेन खुद-ब-खुद इमरजेंसी ब्रेक लगा देगी। यानी दरवाजों में फंसी चीजें घिसटने से बच जाएंगी और जान का खतरा टल जाएगा।दबाव का तुरंत चलेगा पता
DMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कुमार ने जानकारी दी कि यह एंटी-ड्रैग फीचर ट्रेनों के दरवाजों के बीच होने वाले दबाव का तुरंत पता लगाता है और इसी के आधार पर ट्रेन की गति रोकी जाती है। पहले दरवाजों में रुकावट पहचानने की क्षमता 15 मिमी थी जिसे अब घटाकर सिर्फ 7 मिमी कर दिया गया है ताकि पतले कपड़े भी पहचान में आ सकें।कहां लगाई जाएगी यह तकनीक?
DMRC अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक फिलहाल पुरानी मेट्रो लाइनों में ही जरूरी है क्योंकि नई लाइनों जैसे पिंक और मैजेंटा में पहले से ही प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD) लगे हैं, जो दरवाजों में किसी के फंसने की संभावना को बहुत हद तक खत्म कर देते हैं। आने वाले फेज 4 के सभी स्टेशनों पर PSD अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। यात्रियों को और अधिक सतर्क करने के लिए DMRC मेट्रो ट्रेनों के अंदर घोषणाओं के जरिए भी जागरूकता फैला रहा है। यात्रियों को साड़ी, दुपट्टा, धोती या बैग के स्ट्रैप आदि का खास ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।यह भी पढ़े: दिल्ली सरकार की नई पहल, भुक्कड़ों के लिए खुलेगी खास मार्केट
यात्रियों की सुविधाओं का रखा जा रहा ख्याल
इस नई पहल से दिल्ली मेट्रो न केवल सफर को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा रही है, बल्कि तकनीक के जरिए यात्रियों की छोटी-छोटी असुविधाओं को भी गंभीरता से ले रही है। Delhi MetroAdvertisement

















