Chandra Grahan Aaj : चंद्र ग्रहण के दौरान रहें सावधान, ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी

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Chandra Grahan Aaj
locationभारत
userचेतना मंच
calendar10 Oct 2025 06:35 PM
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Chandra Grahan Aaj : 28 अक्टूबर 2023 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, ऐसे में ग्रहण का सूतक काल प्रभावी तथा असरदायक होगा। एक माह में बहुत कम समय अंतराल पड़ने वाले दो ग्रहण बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय पर कई तरह के नियम मानना भी जरूरी होता है तथा कुछ लोगों को विशेष रुप से सावधान रहने की जरुरत होती है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान नियम इत्यादि का पालन जरुर करना चाहिए। लापरवाही करना घातक हो सकता है।

चंद्रग्रहण का ज्योतिषिय प्रभाव

ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक ऐसी घटना है, जिसका प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में कुछ लोगों को बेहद सतर्क रहना चाहिए। खासकर गर्भवती महिलाओं को अपना अधिक ध्यान रखना चाहिए। ग्रहण का उनके साथ-साथ गर्भस्थ शिशु पर भी इसका असर पड़ता है। ग्रहण पर कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस समय पर केवल मंत्र जाप ध्यान के कार्य करने चाहिए।

चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल

आपको बता दें कि 28 अक्टूबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण वर्ष 2023 का अंतिम ग्रहण है। भारत में चंद्र ग्रहण का समय रात 1:06 बजे से रात 2:22 बजे तक है। इसका सूतक काल 9 घंटे पूर्व ही प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहण काल के दौरान देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श नही करना चाहिए। आज लग रहा चंद्र ग्रहण रात्रि समय समाप्त होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा तो सूतक काल पूर्ण रुप से मान्य होगा। ग्रहण काल के दौरान कई बातों का ध्यान रखना जरुरी है और साथ में आचार व्यवहार पर नियंत्रण रखने की जरूरत होती है।

ग्रहण के दौरान चंद्रमा को नंगी आखों से नहीं देखना चाहिए इससे बुरा असर पड़ता है।

गर्भवती स्त्रियों को इसय के दौरान ग्रहण की छाया में जाने से बचना चाहिए। इस समय के दौरान किसी भी नुकूली वस्तु या चाकू, कैंची, सुई आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

ग्रहण के दौरान कुछ भी न खाने पीने से बचना चाहिए। इस समय वातावरण में अशुद्धियां प्रबल होती हैं ऎसे में इस दौरान भोजन की वस्तुओं को ग्रहण करना उचित नही माना जाता है।

ग्रहण के समय पर माना जाता है कि तुलसी को मुंह में रखकर प्रभु का नाम स्मरण करना चाहिए ऎसा करना शुद्धि एवं शुचिता को प्रदान करने वाला होता है।

ग्रहण के समय तथा ग्रहण के समाप्त होने पर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए ऎसा करने से ग्रहण से प्राप्त होने वाले खराब प्रभाव समाप्त होते हैं।

माना जाता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक चीजों का आकर्षण भी अधिक बढ़ जाता है ऎसे में इस स्थिति के दौरान नाम जप की महिमा का उल्लेख मिलता है जिसके द्वारा मन शांत रहता है।

ग्रहण का सूतक काल समय 2023

शास्त्रों में ग्रहण के आरंभ होने से पूर्व सूतक काल का विचार होता है। इस समय पर देवस्थानों या देव मूर्ति पूजन इत्यादि को करना अनुकूल नहीं माना जाता है। इस बार लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक समय 28 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 5 मिनिट से आरंभ हो जाएगा। ग्रहण के सूतक काल के समय पर स्नान दान जप मंत्र जाप सिद्धि तीर्थ स्नान ध्यान इत्यादि करना शुभ होता है। इस समय पर जातकों को अपनी राशि अनुसार दान कार्य करना चाहिए। सूतक काल के समय पर खाना पीना, संभोग, निंद्रा करना, नाखून काटना, तेल लगाना,  बिना वजह का संवाद करना, मूर्ति इत्यादि का स्पर्श मना होता है।

एस्ट्रोलॉजर राजरानी

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नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता के साथ करें देवी ललिता का पूजन बनी रहेगी सुख समृद्धि 

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locationभारत
userचेतना मंच
calendar15 Oct 2025 03:40 PM
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Navratri Fifth day of skandamata Maa: शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता के रुप में पूजा जाता है. इस दिन माता का यह रुप ममतामयी स्वरुप के साथ साथ ज्ञान प्रदान करने वाला होता है. इस दिन माता के पूजन द्वारा भक्त अपने जीवन में प्रेम और समर्पण का गुण लाता है. माता ने अपनी गोद में भगवान कार्तिकेय को बिठा रखा है. अपने पुत्र कार्तिकेय जिनका एक नाम स्कंद भी है उन्हीं के नाम पर उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है. स्कंदमाता का पूजन शास्त्रों के अनुसार जीवन में स्नेह एवं प्रेम को प्रदान करता है. व्यक्ति के भीतर उन गुणों का संचार होता है जिनके द्वारा जीवन पोषण प्राप्त होता है. इस दिन में परंपरा के अनुसार माता का नियम अनुसार पूजन होता है. इस दिन मां ने यह रूप विशेष कारणों से लिया और माता का यह रुप ही सृष्टि के संचालन में शुभता लाने वाला बना. आईये जानें माता के पूजन एवं स्वरुप के बारे में विस्तार पूर्वक-

स्कंदमाता नवरात्रि पूजन 2023 मुहूर्त

पंचांग अनुसार तृतीया तिथि का नवरात्रि 19 अक्टूबर 2023 के दिन व्याप्त रहेगी. बृहस्पतिवार, को सौभाग्य एवं शोभन नामक शुभ योगों की प्राप्ति होगी.  इस दिन रवि योग की प्राप्ति होने से शुभ फल प्राप्त होंगे. शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन प्रात:काल से 06:20 से 12:45 तक शुभ योग पूजन होगा. इसके बाद 13:10 से 1540 का समय पूजा के लिए उत्तम होगा.

स्कंदमाता मंत्र पूजा विधि 

नवरात्रि के इस दिन देवी के मंत्र जाप के साथ आहवान किया जाता है. 'ॐ स्कन्दमात्रै नम: के साथ ही 'या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: नामक मंत्रों का जाप बेहद सकारात्मक माना जाता है. पंचमी के दिन भक्त प्रात:काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर माता का स्मरण करते हैं. इसके बाद माता के स्वरुप का ध्यान करते हुए पूजन आरंभ होता है. माता को सिंदूर, चंदन, अक्षत, पुष्प इत्यादि अर्पित करते हैं. धूप दीप के द्वारा आरती एवं मंत्र से पूजन संपन्न होता है. माता के पूजन के साथ ही भगवान शिव गणेश एवं कार्तिकेय कापूजन भी किया जाता है. शिव परिवार का पूजन करने से शुभता प्राप्त है. उपांग ललिता पूजन  नवरात्रि के पांचवें दिन नवरात्रि पूजन के साथ ही देवी ललिता का पूजन भी होगा. इस दिन उपांग ललिता पूजन द्वारा भक्तों को धन समृद्धि का सुख प्राप्त होगा. मान्यताओं के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन का समय उपांग ललिता का व्रत एवं पूजन शुभ होता है. देवी ललिता का पूजन व्यक्ति को धन धान्य देने वाला होता है.

नवरात्रि का पंचम दिन देगा संतान एवं संपत्ति का सुख 

शारदीय नवरात्रि के पंचम दिन पर देवी स्कंदमाता की पूजा द्वारा संतान सुख की प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान होता है. स्कंदमाता का स्वरुप बहुत ही शुभ माना जाता है. माता की चार भुजाएं हैं. जिनमें माता अपने पुत्र स्कंद को उठाए हैं तथा अन्य भुजाओं में पुष्प सुशोभित हैं तथा अन्य भुजा द्वारा माता भक्तों पर स्नेह का सुख बरसाती हैं. एस्ट्रोलॉजर राजरानी राशिफल 19 अक्टूबर 2023- मेष से लेकर मीन राशि के जातकों के लिए कैसा बीतने वाला है आज का दिन, जानें आज के राशिफल में

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साल के अंतिम शनिश्चरी अमावस्या के दिन राशि अनुसार उपाय देंगे शनि दोष से मुक्ति

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locationभारत
userचेतना मंच
calendar12 Oct 2023 02:37 PM
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Shanishchari Amavasya 2023: इस साल की अंतिम शनि अमावस्या का योग 14 अक्टूबर 2023 को बनेगा. शनि अमावस्या का समय बेहद विशेष माना गया है. शास्त्रों एवं ज्योतिष अनुसार अमावस्या और शनिवार का योग एक साथ होने पर कई तरह के अशुभ प्रभावों से बचव होता है. शनि देव का आशीर्वाद पाने हेतु यह एक अत्यंय शुभ समय भी माना जाता है. शनि अमावस्या पर जहां स्नान-दान का विशेष महत्व होता है. शनिवार की अमावस्या शनिश्चरी अमावस्या के नाम से जानी जाती है. ज्योतिष अनुसार इस समय पर शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ समय होता है.

राशि अनुसार शनि अमावस्या के दिन करें ये उपाय मिलेगा विशेष लाभ

शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति शनि की खराब दशा या शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैय्या के अशुभ प्रभावों को झेल रहा है तो उन के लिए यह समय बेहद खास हो जाता है. शनि देव की पूजा एवं अमावस्या के दिन किया जाने वाला दान कार्य शुभता को प्रदान करता है. मेष राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: मेष राशि के जातकों को शनि अमावस्या के दिन लाल रंग की दाल, चंदन और तांबा आदि का यथाशक्ति दान करना चाहिए. वृषभ राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: वृषभ राशि के जातकों को इस दिन काले तिल , चावल, चांदी, कपड़े आदि चीजों का दान करना चाहिए. मिथुन राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: मिथुन राशि के जातकों को शनि अमावस्या वाले दिन सरसों का तेल, फूल, हरे वस्त्र इत्यादि आदि का दान करना शुभ फलदायी होता है. कर्क राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: कर्क राशि के जातकों को इस दिन चावल, गुड़, कर्पूर , कंबल, सफेद चंदन इत्यादि का दान करना चाहिए. सिंह राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: सिंह राशि के जातकों को इस दिन लाल रंग की दाल, तेल, तिल और गेंहू आदि का दान करना चाहिए कन्या राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: कन्या राशि के जातकों को शनि अमावस्या वाले दिन कांसे का बर्तन, तेल, वस्त्र इत्यादि का दान करना चाहिए. तुला राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: तुला राशि के जातकों को चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, मोती इत्यादि का दान करना चाहिए. वृश्चिक राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: वृश्चिक राशि के जातकों को शनि अमावस्या के दिन लाल रंग के कपड़े, मसूर दाल, गुड़ और मिठाई आदि चीजों का दान करना शुभ होता है. धनु राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: धनु राशि के जातकों को शनि अमावस्या वाले दिन अनाज, कपड़े, पीतल तथा तिलों आदि का दान करना शुभ होता है. मकर राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: इस दिन मकर राशि वालों को काली दाल, काले तिल, कंबल अथवा कपड़े आदि का दान करना चाहिए. कुंभ राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: कुंभ राशि के जातकों को शनि अमावस्या वाले दिन सात तरह का अनाज, लोहा, तेल, उड़द दाल आदि चीजे दान करना चाहिए. मीन राशि के लिए शनि अमावस्या के दिन दान कार्य: मीन राशि के जातक शनि अमावस्या के दिन पर सरसों का तेल और तिलों का दान कर सकते हैं. एस्ट्रोलॉजर राजरानी Rashifal 12 October 2023- आज इन राशियों को मिलेगा विष्णु देव का आशीर्वाद, पढ़ें सभी राशियों का हाल

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